नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि हरित इस्पात के उत्पादन के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को अपनाना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। उन्होंने साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। 
इस्पात मंत्री ने यह टिप्पणी इस्पात क्षेत्र में नवाचार एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आयोजित बिगमिंट फ्यूचर स्टील कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए की। मंत्री ने इस कार्यक्रम को बुधवार को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि हरित इस्पात और स्वच्छ प्रौद्योगिकी अब एक विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता है। कुमारस्वामी ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारा इस्पात उद्योग 2030 तक 30 करोड़ टन क्षमता तक पहुंचने के साहसिक लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हम न केवल विस्तार करने बल्कि 2070 तक शुद्ध शून्य लक्ष्य के अनुरूप स्थिरता लाने को भी प्रतिबद्ध हैं।