लास वेगास (अमेरिका)। वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी लेनोवो, भारत को अपने बुनियादी ढांचा कारोबार के लिए एक प्रमुख निर्यात केंद्र में बदलने की योजना बना रही है। इसके तहत वह वैश्विक बाजारों के लिए देश में कृत्रिम मेधा (एआई) सर्वर डिजाइन एवं विनिर्माण करेगी। सीईएस 2026 के दौरान कंपनी के उपाध्यक्ष एवं महाप्रबंधक स्कॉट टीज ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि कंपनी अपने बेंगलुरु स्थित विकास प्रयोगशाला का उपयोग एआई सर्वर सिस्टम तैयार करने के लिए करेगी जिनका बाद में पांडिचेरी स्थित संयंत्र में घरेलू खपत एवं निर्यात दोनों के लिए विनिर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा, हम अपने कई सिंगल एंड टू-सॉकेट सिस्टम को भारत में ही तैयार करने जा रहे हैं इन्हें भविष्य में एआई के मुख्य आधार के रूप में समझ्ािए। हम इन्हें भारत में ही तैयार करेंगे। डिजाइन एवं इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद हम इनका विनिर्माण भी यहीं करेंगे। यह लेनोवो की वैल्यू चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। टीज ने कहा, भारत में हमारा प्राथमिक ध्यान भारत के लिए भारत पर केंद्रित है। भारत में मोबाइल फोन और पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) का सफलतापूर्वक विनिर्माण पहले से ही हो रहा है और इसमें बड़ी सफलता मिली है। इसलिए भविष्य में भारत में सर्वर बनाकर उन्हें पूरी दुनिया के लिए निर्यात करने में कोई बाधा आने का सवाल ही नहीं उठता। लेनोवो इंडिया उन कंपनियों में से एक है जिन्हें 17,000 करोड़ रुपए की आईटी हार्डवेयर उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन योजना के लिए चुना गया है। नियामक परिदृश्य पर लेनोवो के कार्यकारी अधिकारी ने सॉवरेन एआई के प्रति भारतीय सरकार के दृष्टिकोण की सराहना की। यह एक राष्ट्र द्वारा अपनी घरेलू कंप्यूटिंग क्षमता का विनिर्माण करने की अवधारणा है। एआई डेटा केंद्रों की भारी ऊर्जा खपत से संबंधित पर्यावरणीय चिंताओं पर टीज ने इस बात पर जोर दिया कि उद्योग को पारंपरिक एयर कूलिंग से दूर जाना होगा। उन्होंने कहा कि सामान्य डेटा केंद्रों में, एयर कंडीशनिंग से लागत में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। लेनोवो लिक्विड कूलिंग प्रौद्योगिकियों (लेनोवो नेपच्यून) को बढ़ावा दे रहा है जो ऊर्जा की खपत को लगभग 40 प्रतिशत तक कम करती हैं तथा अपशिष्ट ऊष्मा को अन्य उद्देश्यों के लिए पुनर्चक्रित करने की अनुमति देती हैं।
