तेल अवीव।अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और हमास के बीच हुए युद्धविराम और बंधकों को रिहा करने के समझौते को समर्थन जताने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को इजराइल पहुंचे। ट्रंप ने घोषणा की कि इस समझौते ने युद्ध को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है तथा इसने पश्चिम एशिया में स्थाई शांति के द्वार खोल दिए हैं।
जैसे ही ट्रंप एयरफोर्स वन (अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान) से उतरे, वाहनों का एक काफिला हमास द्वारा समझौते के तहत रिहा किए गए पहले बंधकों को लेकर इजराइल पहुंचा। इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जाेग और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सैन्य बैंड की धुन के बीच ट्रंप का स्वागत किया।
तेल अवीव के होस्टेजेज स्क्वायर में भीड़ ने ट्रंप के स्वागत में नारे लगाए। दो साल के युद्ध के दौरान होस्टेजेज स्क्वायर प्रदर्शनों का केंद्र रहा। हालांकि स्थिति नाजुक बनी हुई है, क्योंकि इजराइल और हमास अब भी सात अक्टूबर, 2023 को शुरू हुए संघर्ष को समाप्त करने की योजना के पहले चरण के कार्यान्वयन के शुरुआती चरणों में हैं, जब हमास के नेतृत्व वाले चरमपंथियों ने संघर्ष विराम समझौते को रद्द कर दिया था।
युद्धविराम समझौते के पहले चरण में हमास द्वारा बंधक बनाए गए अंतिम 48 बंधकों की रिहाई, इजराइल द्वारा बंधक बनाए गए सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों की रिहाई, गाजा में मानवीय सहायता में वृद्धि और गाजा के मुख्य शहरों से इजराइली बलों की आंशिक वापसी शामिल है। बंधकों के अपनों से मिलने की खबर से ही परिवारों में खुशी की लहर है और फलस्तीनियों में मानवीय सहायता में वृद्धि की उत्सुकता है।
वहीं, ट्रंप को लगता है कि इस क्षेत्र को नया रूप देने और इजराइल एवं उसके अरब पड़ोसियों के बीच लंबे समय से बिगड़े संबंधों को फिर से स्थापित करने के लिए बहुत कम समय बचा है। ट्रंप ने एयर फोर्स वन में अपने साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों से कहा, युद्ध समाप्त हो गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि गाजा में हमास और लेबनान में हिज्बुल्ला सहित ईरानी छद्म संगठनों के विनाश के इजराइल के संकल्प के समर्थन में उनके प्रशासन की मध्यस्थता से हुए शांति समझौते की संभावना बढ़ी है।
उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि लोग इससे (युद्ध से) थक चुके हैं और इसी वजह से युद्धविराम कायम रहेगा। व्हाइट हाउस (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) ने कहा कि समझौते की दिशा में प्रगति इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अरब और मुस्लिम देश दशकों से जारी व्यापक इजराइल-फलस्तीन संघर्ष को सुलझाने और कुछ मामलों में अमेरिका के साथ संबंधों को गहरा करने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
