संयुक्त राष्ट्र। भारत ने हाल ही में हस्ताक्षरित गाजा शांति समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया और पुन: दोहराया कि दो-राष्ट्र समाधान ही इजराइल और फलस्तीन के बीच स्थाई शांति स्थापित करने का एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बृहस्पतिवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित त्रैमासिक खुली बहस में, विश्व निकाय में भारत के स्थाई प्रतिनिधि एवं राजदूत पार्वतनेनी हरीश ने कहा, भारत की हार्दिक इच्छा है कि एक स्थिर और शांतिपूर्ण पश्चिम एशिया का सपना साकार हो... वंचना और अपमान किसी के दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं होना चाहिए,संघर्ष के कारण निर्दाेष नागरिकों की जान नहीं जानी चाहिए।  उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में अपने योगदान के लिए पूरी तरह तैयार है।
 
 
 
हरीश ने आशा व्यक्त की कि इस महीने की शुरुआत में शर्म अल-शेख में आयोजित शांति सम्मेलन से उत्पन्न सकारात्मक कूटनीतिक गति क्षेत्र में स्थाई शांति की ओर अग्रसर होगी।उन्होंने इस ऐतिहासिक शांति समझौते का स्वागत करते हुए अमेरिका, विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना की और मिस्र तथा कतर के योगदान की भी प्रशंसा की। भारत की पुरानी नीति दोहराते हुए उन्होंने कहा, दो-राष्ट्र समाधान ही एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है। अब समय है कि सभी पक्ष चल रही शांति प्रक्रिया का समर्थन करें,न कि उसे बाधित करें।