मॉस्को। समय की कसौटी पर खरे उतरे साझेदार भारत और रूस 2025 में अधिक संतुलित एवं विविध आर्थिक संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ़े। दोनों पक्षों ने यह महसूस किया कि द्विपक्षीय व्यापार को रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों से आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर में नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत और रूस ने मजबूत आर्थिक साझेदारी के निर्माण के लिए पांच वर्षीय रूपरेखा सहित कई उपायों की घोषणा की और भारत की व्यापार घाटे से जुड़ी चिंताओं को भी हल किया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को यह भी संदेश दिया कि यूक्रेन युद्ध का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से किया जाना चाहिए।आरटी समाचार चैनल के अनुसार, भारत यात्रा से पहले जब अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख साझेदारों पर ऊंचे शुल्क और प्रतिबंध लगाए जाने की धमकी के बारे में पूछा गया, तो पुतिन ने कहा कि भारतीय जनता अपने देश को ऐसे फैसले लेने के लिए दबाव में नहीं आने देगी, जो उसके राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं के खिलाफ हों। उन्होंने कहा था, भारत कभी भी खुद को किसी के सामने अपमानित नहीं होने देगा। मैं प्रधानमंत्री मोदी को जानता हूं, वह भी ऐसा कोई फैसला नहीं करेंगे। पुतिन का इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क की ओर था। इस अतिरिक्त शुल्क के कारण अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। नई दिल्ली ने इन शुल्कों को अनुचित, तर्कहीन और अव्यवहारिक बताया है।
