दुबई। ईरान के कुछ हिस्सों में सत्ताविरोधी प्रदर्शनों के गति पकड़ने के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शीर्ष ईरानी अधिकारियों ने शुक्रवार को एक-दूसरे को धमकियां दीं। इसी के साथ जून में अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और भी बढ़ गया है। ईरान में प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम सात लोग मारे जा चुके हैं। ए प्रदर्शन आंशिक रूप से ईरान की रियाल मुद्रा के पतन के कारण भड़के थे, लेकिन यह अब तेजी से सत्ताविरोधी प्रदर्शन का रूप लेती जा रही है। ईरान में शुक्रवार को प्रदर्शन छठे दिन में प्रवेश किया और 2022 के बाद से ईरान में ए सबसे बड़े प्रदर्शन हैं। वर्ष 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद देशव्यापी प्रदर्शन शुरू हो गए थे। ट्रंप ने सबसे पहले अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ पर ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्याएं करता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा, हम पूरी तरह से तैयार हैं और कार्वाई को तत्पर हैं। इसके कुछ ही समय बाद, ईरान की सर्वाेच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में कार्यरत संसद के पूर्व अध्यक्ष अली लारिजानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि इजराइल और अमेरिका प्रदर्शनों को भड़का रहे हैं। हालांकि अपने इस दावे को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किया। लारिजानी ने एक्स पर लिखा, ट्रंप को यह पता होना चाहिए कि घरेलू समस्या में अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में अराजकता और अमेरिकी हितों के विनाश के समान है। उन्होंने कहा, अमेरिका के लोगों को यह पता होना चाहिए कि इस तरह के दुस्साहस की शुरुआत ट्रंप ने की है। उन्हें अपने सैनिकों की चिंता करनी चाहिए। हालांकि, ईरान सरकार ने देश में एक्स पर रोक लगाई है।
