नई दिल्ली। दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने की घटना दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल लोक अभियान संस्था की ओर से आन्दोलन को पिछले दो साल से चला रहे हैं। आन्दोलन की इस कड़ी में गोयल हर रोज दो मीटिंग आरडब्ल्यूए के साथ मिलकर पार्कों व कालोनियों में कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि वे केवल लोगों की आवारा कुत्तों को लेकर जो समस्याएं हैं, उनको उठा रहे हैं। उनका विरोध किसी भी जानवर या कुत्ते से नहीं है। गोयल ने कहा कि ये बड़े दु:ख की बात है कि कुछ लोग जो इन आवारा कुत्तों को खाना देते हैं, वे उनसे लड़ने के लिए आ जाते हैं और बुरी-बुरी गालियां देते हैं। अपने आपको ये लोग पशु प्रेमी कहते हैं, पर एक भी आवारा कुत्ते को आज तक इन्होंने गोद नहीं लिया। गोयल ने कहा कि हमारी मांग है कि इन आवारा कुत्तों की 100 प्रतिशत नसबंदी की जाए ताकि उनकी संख्या जो दिल्ली में 8 लाख है, वह 60 लाख न हो जाए। गोयल ने बताया कि यह आन्दोलन चलाकर वे कुत्तों को सम्मान दिला रहे हैं, अन्यथा देश में रोज जो 20,000 कुत्ते, लोगों को काटते हैं, उसके कारण लोग उनसे नफरत करने लगेंगे। आवारा कुत्तों की जनसंख्या में लगाम लगाना जरूरी है। गोयल ने बताया कि लोगों को जानकारी नहीं है कि देश भर में 12 करोड़ से अधिक कुत्ते हैं। अकेले दिल्ली में 8 लाख से ज्यादा और 2000 केस कुत्तों के काटने के दिल्ली में प्रतिदिन आते हैं। अकेले राम मनोहर लोहिया अस्पताल में प्रतिदिन 200 केस आते हैं। गोयल ने बताया कि आवारा कुत्तों की समस्याओं को लेकर पशुपालन मंत्रालय भारत सरकार दिल्ली स्वास्थ्य मंत्रालय राज्य सरकारें एवं स्थानीय निकाय जिम्मेदार हैं। दिल्ली के अन्दर एमसीडी ने कुत्तों की नसबन्दी की जिम्मेदारी सिर्फ 12 एनजीओ को दे रखी है, जिनमें काफी भ्रष्टाचार है, इनमें से बहुत सी संस्थाएं विदेशी फंडिंग के लालच में चल रही हैं। गोयल ने बताया कि पार्कों के अन्दर लोगों ने अपने बच्चों को भेजना बन्द कर दिया है और लोगों ने कुत्तों से बचने के लिए लाठियां पकड़ना शुरू कर दिया है। गोयल ने कहा कि आरडब्ल्यूए संगठित होकर आवारा कुत्तों की समस्याओं का निदान चाहती है, इसलिए हमारा यह आन्दोलन चल रहा है।
