नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा की समृद्ध विरासत को लोगों तक पहुंचाने के लिए उसकी विरासत को संरक्षित कर प्रदर्शित किया जाएगा। इस पहल के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) तीन सप्ताह के भीतर एक अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। परियोजना की प्रगति की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें आईजीएनसीए, राष्ट्रीय अभिलेखागार, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विधानसभा सचिवालय और विभिन्न विशेषज्ञों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बता दें कि मंगलवार को दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ विधानसभा भवन के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक समग्र विकास योजना तैयार करने की दिशा में चर्चा की गई। बैठक के बाद विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह भवन केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक विरासत का प्रतीक है दिल्ली विधान सभा स्वतंत्र भारत की पहली संसद थी। उन्होंने बताया कि विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के लिए विधानसभा परिसर में एक भव्य लाइट एंड साउंड शो आयोजित किया जाएगा, जो इसकी ऐतिहासिकता और लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करेगा। साथ ही, विधानसभा के इतिहास पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का भी निर्माण किया जाएगा। भविष्य में यहां एक संग्रहालय भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें विधानसभा की समृद्ध विरासत को संरक्षित कर प्रदर्शित किया जाएगा। बैठक में पारंपरिक स्थापत्य तकनीकों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, जिससे हमारे पूर्वजों की कलात्मकता और शिल्प को सम्मान मिल सके। इस पहल का उद्देश्य विधानसभा परिसर को राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करना है, जो देश-विदेश के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने। इस बैठक में आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के डीन (प्रशासन) डॉ रमेश सी गौर, राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. बी आर मणि, आईजीएनसीए प्रमुख, संरक्षण एवं कलादर्शन विभाग डॉ. अचल पांडा, विरासत प्रकोष्ठ के अपर आयुक्त जितेन्द्र यादव, केंद्रीय एवं नई दिल्ली रख-रखाव मंडल के अधीक्षण अभियंता कृष्ण कुमार सिंह और एमसीडी विरासत प्रकोष्ठ के कार्यकारी अभियंता संजीव कुमार शामिल थे। बैठक में विशेषज्ञों द्वारा यह सुझाव दिया गया कि आधुनिक संरक्षण तकनीकों को पारंपरिक मूल्यों के साथ जोड़ते हुए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाए, ताकि भवन की मूल संरचना की आत्मा को बरकरार रखते हुए देश-विदेश के लोगों को एक समृद्ध अनुभव प्रदान किया जा सके। अध्यक्ष गुप्ता ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि दिल्ली विधानसभा को एक जीवंत विरासत स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो भारत में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के विकास और दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बनेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि जनता को विधानसभा परिसर के भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाए विशेषकर सप्ताहांत में ताकि वे अपने लोकतंत्र की ऐतिहासिक नींव से सीधे जुड़ सकें। यह बैठक इस बहुपर्यायी विरासत विकास योजना की पहली शुरुआत है जिसमें विधान सभा परिसर की बनावट का मूल्यांकन किया जाएगा और इस संबंध में विस्तृत योजना बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य विधानसभा की ऐतिहासिक महत्ता को देश और दुनिया में पहचान दिलाना है।
