चंडीगढ़। केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे की समय-सीमा दिए जाने के एक दिन बाद इस पड़ोसी देश के कई नागरिक बृहस्पतिवार को अटारी-वाघा सीमा मार्ग से स्वदेश लौटने लगे। केंद्र ने पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार (अताशे) को निष्कासित करने, 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने और कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए भीषण आतंकवादी हमले के सीमा-पार संबंधों के मद्देनजर अटारी भूमि-पारगमन चौकी को तत्काल बंद करने सहित कई उपायों की बुधवार को घोषणा की। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, पाकिस्तानी नागरिकों को दक्षेस वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस वीजा योजना के तहत फिलहाल भारत में मौजूद किसी भी पाकिस्तानी नागरिक के पास देश छोड़ने के लिए 48 घंटे का समय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने यह निर्णय लिया। बैठक में घोषणा की गई कि अटारी में एकीकृत चेक-पोस्ट (आईसीपी) को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा और जो लोग वैध दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान गए हैं, वे एक मई से पहले उस रास्ते से वापस आ सकते हैं। 
बृहस्पतिवार की सुबह कई पाकिस्तानी परिवार अटारी-वाघा सीमा मार्ग से स्वदेश लौटने के लिए अमृतसर स्थित आईसीपी पर पहुंचे। कराची के एक परिवार ने कहा कि वे लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने दिल्ली गए थे। परिवार के एक सदस्य ने कहा, हम 15 अप्रैल को यहां (भारत) आए थे और आज हम घर लौट रहे हैं, हालांकि हमारे पास 45 दिनों का वीजा था। पहलगाम हमले पर एक सवाल का जवाब देते हुए, पाकिस्तानी नागरिक ने कहा, जिसने भी यह किया है वह पूरी तरह से गलत है। हम दोनों देशों के बीच आपसी भाईचारा और दोस्ती चाहते हैं। मंसूर नामक एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ 15 अप्रैल को 90 दिन के वीजा पर भारत आया था। मंसूर ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए कहा, लेकिन हम आज घर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था।
पाकिस्तान जाने के लिए वीजा प्राप्त कुछ भारतीय नागरिक भी बृहस्पतिवार को आईसीपी पहुंचे, जिनमें गुजरात का एक परिवार भी शामिल था, जो कराची में अपने रिश्तेदारों से मिलने जाना चाहता था। परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य ने कहा, हमें दो महीने पहले वीजा मिला था।