नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को दिए गए पानी का इस्तेमाल करने के लिए अल्प, मध्य और दीर्घकालिक योजनाएं बनाएगी। चौहान ने कहा कि इन योजनाओं के जरिए किसानों, विशेषकर सीमावर्ती राज्यों के किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि 1960 में हुए सिंधु जल समझौते को स्थगित रखना देश के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय है। सरकार ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की हत्या के बाद दशकों पुराने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। मृतकों में अधिकतर पर्यटक थे। केंद्रीय मंत्री ने पाकिस्तान के साथ 1960 के इस समझौते को तत्कालीन सरकार की ऐतिहासिक भूल करार देते हुए कहा कि इसके कारण पड़ोसी देश ने अधिकतम पानी का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, मैं अपने किसानों से एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करना चाहता हूं। एक ऐतिहासिक गलती हुई थी और वह थी 1960 में सिंधु जल समझौता। कृषि मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस समझौते के कारण सिंधु, चिनाब और झेलम सहित भारतीय नदियों का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान चला जाता है। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने इस संधि को निलंबित कर दिया है। चौहान ने कहा, भारत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि की और दीर्घकालिक योजनाएं बनाएगी कि पानी की प्रत्एक बूंद का उपयोग हमारे किसानों द्वारा किया जाए। उन्होंने कहा कि इस समझौते को स्थगित किया जाना किसान समुदाय के हित में है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस समझौते के स्थगित होने से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी मिलेगा। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के सफल क्रियान्वयन के लिए भारतीय सेना की सराहना भी की।
