पुंछ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तानी सैनिकों की ओर से सीमा पार से की गई गोलाबारी के पीड़ितों से मिलने के लिए शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले का दौरा किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद शाह का केंद्र शासित प्रदेश का यह पहला दौरा है। शाह ने कहा कि क्षतिग्रस्त मकानों, व्यवसायों और धार्मिक स्थलों के लिए केंद्र द्वारा जल्द ही एक पैकेज की घोषणा की जाएगी। पुंछ पहुंचने के तुरंत बाद शाह पाकिस्तानी गोलाबारी में क्षतिग्रस्त हुए गुरुद्वारा सिंह सभा गए। उन्होंने गोलाबारी प्रभावित क्षेत्रों में अन्य स्थानों का भी दौरा किया और लोगों से बातचीत की। अपनी यात्रा के दौरान शाह ने उन निवासियों और परिवारों से मुलाकात की जिन्होंने गोलाबारी में अपने प्रियजनों को खो दिया है और जिनकी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
जम्मू क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर आए शाह ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और दिल्ली के मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा के साथ शहर में गोलाबारी प्रभावित स्थानों का दौरा किया। उनका स्वागत भारत माता की जय के नारों के साथ किया गया। शाह ने प्रभावित दुकानदारों से भी मुलाकात की। शाह ने पुंछ में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों, खासकर पुंछ में भारी गोलाबारी करके बेहद निंदनीय कृत्य किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने बिना किसी नागरिक को नुकसान पहुंचाए सीमा पार आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर जवाबी कार्वाई की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पुंछ में नागरिकों के मकानों, मंदिरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, यह बहुत ही निंदनीय कृत्य है। पाकिस्तान ने नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। इस उकसावे वाली कार्वाई के बाद ही हमारी सेना ने पूरी ताकत और सटीकता से जवाब दिया। शाह ने कहा कि क्षतिग्रस्त मकानों, व्यवसायों और धार्मिक स्थलों के लिए केंद्र जल्द ही एक पैकेज पेश करेगा। वह बृहस्पतिवार को जम्मू पहुंचे थे और छह अप्रैल के बाद से जम्मू-कश्मीर की उनकी यह तीसरी यात्रा है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने बृहस्पतिवार की रात यहां जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति और वार्षिक अमरनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत छह मई की देर रात पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकवादी ढांचों को ध्वस्त कर दिया था। यह अभियान पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में चलाया गया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर पर्यटक थे। हजारों लोगों को नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट अपने घरों को छोड़कर सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।