नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर फिर से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि देश में कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए यही संगठन जिम्मेदार है।उन्होंने यह भी कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है।
 
 
खरगे ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए संवाददाताओं से कहा, मेरा व्यक्तिगत विचार है और खुलकर बोलूंगा कि (आरएसएस पर प्रतिबंध) लगना चाहिए। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जो चीजें (आरएसएस को लेकर) हमारे सामने रखी हैं, अगर उसकी मर्यादा प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) और शाह (गृह मंत्री अमित शाह) रखते हैं तो यह (प्रतिबंध) होना चाहिए।
 
 
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया, आज देश में जो गड़बड़ियां हो रही हैं और कानून-व्यवस्था की समस्यां पैदा हो रही हैं, ए सब भाजपा और आरएसएस की वजह से हैं।  कुछ दिन पहले ही खरगे के पुत्र और कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से आग्रह किया था कि वह सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आरएसएस और ऐसे अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों व गतिविधियों में भाग लेने से सख्ती से रोकें।
 
 
 सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सरदार पटेल की जयंती पर संवाददाताओं से कहा कि भारतीय जनता पार्टी को याद रखना चाहिए कि उसके मूल संगठन (आरएसएस) पर पटेल ने प्रतिबंध लगाया था और आज जरूरत है कि इस देश में कोई सरदार पटेल बने और इस विचारधारा पर फिर से प्रतिबंध लगे।
 
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, जिन लोगों ने गांधी जी की हत्या की थी, आज उन्हीं के लोग कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी सरदार पटेल को याद नहीं करती। सरदार वल्लभ भाई पटेल देश को एक करने वाले नेता हैं। उन्होंने संविधान सभा में मौलिक अधिकारों से जुड़े अपने विचार रखे और संविधान में जगह बना कर दी।  उन्होंने दावा किया, सरदार पटेल कहते थे कि संघ के भाषण सांप्रदायिकता से भरे हैं। संघ के कारण ही गांधी जी की हत्या हुई थी। भाजपा-आरएसएस हमेशा देश के लिए घातक रहे हैं, वहीं कांग्रेस हमेशा देश की भलाई के बारे में सोचती है। 
 
 
उनके अनुसार, पहले के समय में लोग नौकरशाही में रहते हुए आरएसएस की विचारधारा फैलाते थे और ऐसे में आरएसएस और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के साथ सरकारी कर्मचारियों के साथ जुड़ाव पर रोक लगाई गई थी।  खरगे ने कहा, लेकिन, 9 जुलाई, 2024 को मोदी सरकार ने इस रोक को हटा लिया, जिससे सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस और उसकी गतिविधियों से जुड़ने की अनुमति मिल गई है।