नई दिल्ली। निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने शुक्रवार को कहा कि वह वकील तथा न्यायाधीश के रूप में करीब चार दशक की अपनी यात्रा के समापन पर संतोष और संतृप्ति की भावना के साथ और न्याय के विद्यार्थी के रूप में न्यायालय छोड़ रहे हैं। न्यायमूर्ति गवई ने अपने विदाई समारोह के दौरान एक रस्मी पीठ के समक्ष कहा, आप सभी को सुनने के बाद, और खासकर अटॉर्नी जनरल (आर वेंकटरमणि) और कपिल सिब्बल की कविताओं और आप सभी की गर्मजोशी भरी भावनाओं को जानने के बाद, मैं भावुक हो रहा हूं।  इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश नियुक्त हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन भी थे। शाम को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक अन्य विदाई समारोह में, 52वें प्रधान न्यायाधीश ने अपने एक फैसले के कारण अपने ही समुदाय से मिली नाराजगी को याद किया, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जातियों (एससी) की क्रीमी लेयर को भी प्रवेश और नौकरियों में आरक्षण के लाभ से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा, संविधान का एक उत्साही विद्यार्थी होने के नाते, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के गुण हमेशा मेरे दिल के करीब रहे हैं।