गुवाहाटी/कोकराझार/हाफलोंग। असम के छह समुदायों की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग से संबंधित रिपोर्ट को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। सरकार ने रविवार को दावा किया कि रिपोर्ट सभी वर्गों के लिए संतोषजनक है, जबकि विपक्षी दलों ने कहा कि यह अस्पष्ट है। राज्य की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल कई समूहों द्वारा जारी प्रदर्शन के बीच, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर एसटी का दर्जा मांगने वाले छह समुदायों और मौजूदा ऐसे समूहों के बीच संघर्ष भड़काने का प्रयास करने का आरोप लगाया। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि रिपोर्ट पेश करना दशकों पुराने मुद्दे के समाधान की दिशा में पहला कदम है। अहोम, चुटिया, मोरन, मटक, कोच-राजबोंगशी और चाय जनजाति (आदिवासी) समुदायों द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग पर मंत्रिसमूह (जीओएम) की रिपोर्ट शनिवार को विधानसभा में रखी गई। अगर इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाता है, तो वे शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण के दायरे में आ जाएंगे। रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों के लिए त्रि-स्तरीय आरक्षण प्रणाली की सिफारिश की गई है, ताकि मौजूदा आदिवासी समूहों के कोटे को प्रभावित किए बिना मांग पूरी की जा सके। सोनितपुर जिले में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में शर्मा ने कहा कि रिपोर्ट सभी को स्वीकार्य है। उन्होंने कहा, रिपोर्ट अब सामने आ गई है और इसे हर कोई देख सकता है। मुझे लगता है कि यह रिपोर्ट सभी वर्गों को संतुष्ट करने में कामयाब रही है।