नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना ने बुधवार को कहा कि दक्षिण भारतीय लोग हिंदी नहीं जानने की वजह से अलग-थलग नहीं पड़ना चाहते हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने न्यायपालिका में हिंदी के इस्तेमाल से जुड़े एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी को राजनीतिक संदर्भ में नहीं लिया जाना चाहिए।न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि भारत एक उपमहाद्वीप है और कोई भी अपनी भाषा के मामले में बहुत विशिष्ट नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में बहुत सारी भाषाएं शामिल हैं और दक्षिण भारत में कम-से-कम छह भाषाएं हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि कोई भी अपनी भाषा में बहुत विशिष्ट नहीं हो सकता है और अंग्रेजी भाषा विभिन्न दक्षिण भारतीय राज्यों को जोड़ने का काम करती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई तमिलनाडु जाता है तो वहां कोई भी अंग्रेजी या हिंदी नहीं बोलता है और ऐसे में संवाद एक मुद्दा बन जाता है।