नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी, जिसमें 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही कहा कि सेंगर को रिहा नहीं किया जाएगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की एक अवकाशकालीन पीठ सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में कानून से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए हैं, जिनपर विचार किया जाना आवश्यक है। उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई की याचिका पर सेंगर को नोटिस भी जारी किया और उससे चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि सामान्यत: जब किसी दोषी या विचाराधीन कैदी को निचली अदालत या उच्च न्यायालय के आदेश के तहत जमानत पर रिहा किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को सुने बिना उस आदेश पर उसके द्वारा रोक नहीं लगाई जाएगी। पीठ ने यह भी कहा कि सेंगर को एक अन्य मामले में भी दोषी ठहराया गया है और उस मामले में वह अब भी हिरासत में है। पीठ ने कहा, मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हम उच्च न्यायालय द्वारा 23 दिसंबर, 2025 को पारित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हैं।परिणामस्वरूप, प्रतिवादी (सेंगर) को उक्त आदेश के आधार पर हिरासत से रिहा नहीं किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में उसके विचार के लिए कानून से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न उत्पन्न हुए हैं।
