इंदौर (मध्यप्रदेश)। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के प्रकोप की प्रभावी रोकथाम और मरीजों की शीघ्र पहचान के लिए शनिवार से रिंग सर्वेक्षण शुरू किया गया और इस कवायद को अंजाम दे रहे दल 5,000 से ज्यादा घरों में पहुंचे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिंग सर्वेक्षण , किसी बीमारी के प्रकोप के स्रोत, स्वरूप और प्रसार को समझने की विशिष्ट विधि है जिसमें मरीज के आस-पास के लोगों का अध्ययन किया जाता है ताकि रोग के कारण और इसकी प्रभावी रोकथाम के उपाय खोजे जा सकें। अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में इस सर्वेक्षण के दौरान हर हॉटस्पॉट (जिन घरों में उल्टी-दस्त के ज्यादा मरीज मिले हैं) के आस-पास के 50 घरों में लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है।उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण को 16 दल अंजाम दे रहे हैं जिनमें चिकित्सा अधिकारियों और नर्सिंग अधिकारियों के साथ ही आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और गैर सरकारी संगठनों के स्वयंसेवक शामिल हैं।अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को भागीरथपुरा के 5,079 घरों के सर्वेक्षण के दौरान 25,395 लोगों की जांच में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षणों वाले 65 मरीज मिले जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। उन्होंने बताया कि 15 अन्य मरीजों को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में भेजा गया। अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद अब तक अस्पतालों में कुल 354 मरीजों को भर्ती किया गया है जिनमें से 205 लोगों को स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई है।
