तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार हरित हाइड्रोजन पर नीति बनाने पर विचार कर रही है और इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं चल रही हैं। यह जानकारी बुधवार को राज्य के विद्युत मंत्री के. कृष्णनकुट्टी ने विधानसभा में दी। उन्होंने बताया कि हरित हाइड्रोजन नीति का एक मसौदा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी (एएनईआरटी) द्वारा तैयार कर सरकार को सौंपा गया है, जो अक्षय ऊर्जा के मामलों के लिए राज्य की नोडल एजेंसी है। उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान बताया विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं चल रही हैं। उम्मीद है कि इसे जल्द अंतिम रूप देकर स्वीकृति मिल जाएगी।  कृष्णनकुट्टी ने बताया कि राज्य सरकार को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय से हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर परियोजना के क्रियान्वयन की मंजूरी मिल चुकी है, जिसे एएनईआरटी के अंतर्गत लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 133.18 करोड़ रुपए की यह परियोजना केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत स्वीकृत की गई है और यह देश स्तर पर मंजूर चार परियोजनाओं में से एक है। मंत्री ने कहा, पायलट चरण में कुल 57 टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।  उन्होंने बताया कि पायलट परियोजना में हरित हाइड्रोजन का उपयोग मुख्य रूप से भारी सड़क परिवहन वाहनों, हाउसबोट आदि में किया जाएगा।