कलबन (जम्मू-कश्मीर)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पुंछ जिले में जमीन धंसने से प्रभावित कलबन सीमा क्षेत्र के लोगों से बुधवार को मुलाकात की और उम्मीद जताई कि केंद्र पंजाब, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड की भांति इस केंद्रशासित प्रदेश को भी अच्छा पैकेज देगा। अब्दुल्ला ने कहा कि प्रशासन को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए पुनर्वास योजना तैयार करने को कहा गया है, जिसमें मौजूदा नीति के तहत पांच मरला (एक मरला 272.251 वर्ग फुट के फुट बराबर होता है) भूमि देने की बात भी शामिल है। अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, हम केंद्र सरकार के संपर्क में बने हुए हैं और उसने एक टीम गठित की है जो जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों का दौरा कर चुकी है। हम अपनी मांगें टीम के सामने रखेंगे और उम्मीद करते हैं कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की तरह जम्मू-कश्मीर को भी अच्छा पैकेज दिया जाएगा।  अपने दौरे के दौरान, अब्दुल्ला ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास मेंढर तहसील के कलबन गांव में जमीन धंसने से हुए नुकसान का आकलन किया। ग्यारह सितंबर से अब तक।,000 से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, 95 से ज़्यादा घर, एक कब्रिस्तान और एक मस्जिद क्षतिग्रस्त हो गई है। लोगों को सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाया गया है। गांव के असुरक्षित हो जाने के बाद सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछे जाने अब्दुल्ला ने कहा, जहां भी ज़मीन धंस गई है या धंस रही है, वहां लोगों को दोबारा बसाया नहीं जा सकता। उन्हें कहीं और, किसी नई जगह पर बसाना होगा।  उन्होंने कहा कि सरकार के पास पहले से ही एक योजना है जिसके तहत भूमिहीन लोगों को पांच मरला सरकारी ज़मीन दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा, इसी तर्ज़ पर, हमने प्रशासन से एक प्रस्ताव तैयार करने को कहा है, जिसे मंत्रिमंडल के समक्ष सावधानीपूर्वक विचार और अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।  जन-सहयोग प्रयासों के बारे में उन्होंने कहा, इस कठिन समय में लोगों की यथासंभव मदद करना हमारा कर्तव्य है। इस बार, बारिश से जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन के कारण अभूतपूर्व नुकसान पहुंचा है।  उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शायद ही कोई ऐसा जिला है जहां बाढ़, भूस्खलन या भारी बारिश से नुकसान न हुआ हो। उमर अब्दुल्ला ने कहा, हमारे पास जो भी वित्तीय संसाधन हैं, हम उनका उपयोग लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए करेंगे।