ईटानगर।  अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने घोषणा की है कि राज्य सरकार इनर लाइन परमिट (आईएलपी) प्रणाली में व्यापक डिजिटल बदलाव लागू करने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे राज्य में गैर-अरुणाचली लोगों की आवाजाही को लेकर निगरानी बढ़ाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया। कुरुंग कुमे जिले के कोलोरियांग में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में खांडू ने कहा कि डिजिटल एकीकरण की प्रक्रिया लगभग तीन वर्षों से जारी है और परियोजना अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर गई है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी साझेदारों ने बैकएंड एकीकरण पहले ही पूरा कर लिया है और नई आईएलपी प्रणाली आने वाले महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। बैकएंड एकीकरण से आशय विभिन्न सिस्टम, सर्वर, डेटाबेस और सॉफ्टवेयर सेवाओं को आपस में जोडऩे से है ताकि वे एक साथ मिलकर सुचारू रूप से काम कर सकें। खांडू ने कहा कि उन्नत डिजिटल मंच राज्य को सभी आगंतुकों, प्रवासी श्रमिकों और मौजूदा आईएलपी धारकों का पूरा एवं वास्तविक समय में रिकॉर्ड उपलब्ध कराएगा। अरुणाचल प्रदेश बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन (बीईएफआर), 1873 के तहत संरक्षित है, जिसके अनुसार राज्य के बाहर के भारतीय नागरिकों सहित सभी गैर-निवासियों को अरुणाचल में प्रवेश करने से पहले आईएलपी प्राप्त करना अनिवार्य है। आईएलपी प्रणाली एक नियामक और सुरक्षात्मक तंत्र, दोनों के रूप में कार्य करती है, जो राज्य के स्वदेशी समुदायों, भूमि अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने में मदद करती है।