पणजी। प्रस्तावित गोवा बाघ अभयारण्य पर उच्चतम न्यायालय की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा अपनी सिफारिशें सौंपे जाने के कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि रिपोर्ट देखने के बाद निर्णय लिया जाएगा। केंद्रीय अधिकारी प्राप्त समिति (सीईसी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राज्य के संरक्षित क्षेत्र, जो काली बाघ अभयारण्य (कर्नाटक) के केंद्र से सीधे सटे हुए हैं और जहां अपेक्षाकृत कम परिवार हैं, जैसे नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य (50 परिवार) और कोटिगाओ वन्यजीव अभयारण्य (41 परिवार), को प्रस्तावित गोवा बाघ अभयारण्य के पहले चरण में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। इसमें सिफारिश की गई है कि भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य और महादेई वन्यजीव अभयारण्य के दक्षिणी भाग जैसे अधिक संख्या में घरों वाले संरक्षित क्षेत्रों को अभयारण्य के प्रथम चरण में शामिल नहीं किया जाएगा। सीईसी ने गैर लाभकारी संगठन गोवा फाउंडेशन समेत सभी पक्षकारों से मुलाकात करने के बाद 21 नवंबर को उच्चतम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट सौंपी। एनजीओ ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि राज्य सरकार इस क्षेत्र को बाघ अभयारण्य घोषित करे। सावंत ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार रिपोर्ट के निष्कर्षों पर गौर किए बिना कोई टिप्पणी नहीं करेगी।