लखनऊ । उत्तर प्रदेश के कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा और दिन में देर तक बना रहा, जिससे राज्य के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही हैं। यह जानकारी मौसम विभाग ने शुक्रवार को दी। मौसम विभाग के अधिकारियों ने इस स्थिति के लिए उत्तर भारत से होकर गुजरने वाली पश्चिमी हवाओं को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, पिछले 72 घंटे में कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया, जबकि न्यूनतम तापमान में अधिक बदलाव नहीं हुआ। पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटे तक मौसम की ऐसी ही स्थिति बनी रहने की संभावना है, जिसमें राज्य के कई हिस्सों में घना से बहुत घना कोहरा और ठंड से लेकर बहुत अधिक ठंड पड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इसके बाद आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी और कोहरे की तीव्रता में कमी आने की संभावना है।

मौसम केंद्र, लखनऊ ने कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जिन इलाकों में बहुत घना कोहरा छाने की संभावना है, उनमें कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, कानपुर नगर और देहात, उन्नाव, रायबरेली, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, आगरा, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, पीलीभीत और आसपास के इलाके शामिल हैं। मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार को लखनऊ में दिन के तापमान में तेज गिरावट आई, अधिकतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 7.5 डिग्री कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री ज़्यादा है।

विभाग ने बताया कि सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच लखनऊ में कोई बारिश दर्ज नहीं की गई। मौसम विभाग ने कहा कि लखनऊ और आसपास के इलाकों में देर रात और सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की बहुत ज़्यादा संभावना है, जबकि दिन में आसमान ज़्यादातर साफ़ रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने कहा कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 20 डिग्री सेल्सियस और 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।इस बीच, राहत आयुक्त कार्यालय ने बताया कि राज्य भर में 12 करोड़ से अधिक मोबाइल इस्तेमालकर्ताओं को मौसम अलर्ट भेजे गए हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कंबल वितरण, नाइट शेल्टर और अलाव की लगातार निगरानी की जा रही है, जबकि 1070 हेल्पलाइन के ज़रिए आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही है।